पीएम मोदी से सीएम धामी ने की मुलाकात, उत्तराखंड आने और चारधाम यात्रा का दिया न्योता

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को उत्तराखंड आने का औपचारिक न्योता दिया और आगामी चारधाम यात्रा में शामिल होने का आग्रह किया। मुलाकात के दौरान धामी ने प्रधानमंत्री को टिहरी जिले स्थित प्रसिद्ध मां सुरकंडा देवी मंदिर का स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। दोनों नेताओं के बीच राज्य के विकास, पर्यटन, अवसंरचना और चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और राज्य सरकार यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम कर रही है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में राज्य सरकार सड़क, स्वास्थ्य, संचार, पार्किंग, आवास और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड आकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाएं। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को राज्य में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पुनर्निर्माण परियोजनाओं सहित कई योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री का इन परियोजनाओं के लिए निरंतर सहयोग देने पर आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को बताया कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए तकनीक का भी व्यापक उपयोग कर रही है। इस बार पंजीकरण व्यवस्था को और सरल बनाया गया है, साथ ही यात्रियों के लिए हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम और मेडिकल सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और आपदा प्रबंधन टीमें तैनात की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन कराए जाएं और यात्रा का अनुभव बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य में पर्यटन के नए डेस्टिनेशन विकसित करने की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर, इको और होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को विकसित कर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, राज्य में हेली सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को भी यात्रा में सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को सुरकंडा देवी मंदिर का स्मृति चिन्ह भेंट किया

मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को सुरकंडा देवी मंदिर का स्मृति चिन्ह भेंट किया। यह मंदिर टिहरी जनपद में स्थित एक प्रमुख शक्ति पीठ माना जाता है और हाल ही में यहां रोपवे सहित कई सुविधाओं का विकास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां के मंदिरों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व देश-विदेश में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड आकर इन धार्मिक स्थलों के दर्शन करें। प्रधानमंत्री मोदी ने भी उत्तराखंड में चल रही विकास योजनाओं और चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर संतोष जताया। उन्होंने राज्य सरकार को श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है और यहां की व्यवस्थाएं बेहतर होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। मुलाकात को चारधाम यात्रा से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर वर्ष यात्रा शुरू होने से पहले राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाने और व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर देती है। इस बार भी मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर यात्रा की तैयारियों और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। माना जा रहा है कि इससे चारधाम यात्रा को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं, जिससे होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और अन्य सेवाओं को बड़ा लाभ मिलता है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस बार यात्रा को और व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। मुख्यमंत्री धामी ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस वर्ष की चारधाम यात्रा सफल और सुव्यवस्थित होगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है और सरकार उनकी सुविधा के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

समर वेकेशन से पहले बंपर ऑफर: होटल में तीसरी रात मुफ्त, फ्लाइट-होटल बुकिंग पर हजारों की छूट

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही देशभर में छुट्टियों की प्लानिंग तेज हो गई है। परिवार, दोस्त और कॉरपोरेट ग्रुप आने वाले महीनों में पहाड़ों, समुद्री तटों और पर्यटन स्थलों पर घूमने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए ट्रैवल कंपनियों, होटल चेन और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म ने आकर्षक ऑफर पेश करने शुरू कर दिए हैं। कहीं दो रात रुकने पर तीसरी रात मुफ्त दी जा रही है तो कहीं फ्लाइट, होटल और हॉलिडे पैकेज पर हजारों रुपये तक की छूट दी जा रही है। इन ऑफर्स का मकसद यात्रियों को पहले से बुकिंग के लिए प्रोत्साहित करना और समर सीजन की बढ़ती मांग को भुनाना है। होटल इंडस्ट्री में भी समर सीजन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। कई होटल चेन सीमित अवधि के लिए विशेष पैकेज लेकर आई हैं। सरोवर होटल्स ने ऐसा ही एक ऑफर शुरू किया है, जिसके तहत मेहमान दो रात ठहरने पर तीसरी रात मुफ्त में बिता सकते हैं। इसके अलावा, कई प्रॉपर्टी में भोजन और पेय पदार्थों पर 15 प्रतिशत तक की छूट भी दी जा रही है। परिवारों को आकर्षित करने के लिए होटल चेन 10 साल तक के बच्चों को मुफ्त ठहरने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध करा रही है। इस तरह के ऑफर परिवारों के लिए यात्रा को अधिक किफायती बना रहे हैं।

सरोवर होटल्स की निदेशक (मार्केटिंग-कम्युनिकेशन) नीतिका खन्ना के अनुसार, गर्मियां भारत में यात्रा का सबसे मजबूत सीजन होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ छुट्टियां मनाने निकलते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए होटल चेन आकर्षक और किफायती पैकेज लेकर आई है, ताकि मेहमान लंबी अवधि तक ठहर सकें और अलग-अलग लोकेशन पर होटल की सुविधाओं का लाभ उठा सकें। उनका कहना है कि इस तरह के ऑफर से न केवल ग्राहकों को फायदा होता है, बल्कि होटल इंडस्ट्री में बुकिंग भी पहले से बढ़ने लगती है। सिर्फ होटल ही नहीं, ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म भी इस सीजन में आक्रामक मार्केटिंग कर रहे हैं। क्लियरट्रिप ने अपने वार्षिक ‘नेशन ऑन वेकेशन’ अभियान के तहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, होटल बुकिंग, बस टिकट और हॉलिडे पैकेज पर भारी छूट की घोषणा की है। कंपनी यात्रियों को सह-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड के जरिए अतिरिक्त लाभ भी दे रही है। इन ऑफर्स के जरिए ग्राहक पहले से यात्रा की योजना बनाकर कम कीमत पर टिकट और होटल बुक कर सकते हैं। क्लियरट्रिप की मुख्य विपणन और राजस्व अधिकारी पल्लवी सक्सेना का कहना है कि गर्मियों में यात्रा की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कंपनी ग्राहकों के लिए ऐसे ऑफर लेकर आई है, जिससे वे बिना किसी झिझक के यात्रा की योजना बना सकें। उनका मानना है कि आकर्षक छूट और आसान बुकिंग विकल्प यात्रियों में उत्साह बढ़ाते हैं और पर्यटन उद्योग को भी गति देते हैं।

इसी तरह ईजमाईट्रिप ने भी ‘सनी गेटअवे सेल’ के तहत कई ऑफर पेश किए हैं। कंपनी उड़ानों पर 5,000 रुपये तक और होटल बुकिंग पर 10,000 रुपये तक की छूट दे रही है। इसके अलावा बस, कैब और हॉलिडे पैकेज पर भी विशेष रियायत दी जा रही है। कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मियों का सीजन करीब आ रहा है, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों के लिए मांग बढ़ रही है और ग्राहक किफायती विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में ये ऑफर यात्रियों को कम खर्च में बेहतर यात्रा अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

घूमने वाले लोगों के लिए ट्रैवल कंपनियों की यह स्कीम फायदे में हो सकती है?

ट्रैवल कंपनियों के ये ऑफर ऐसे समय में सामने आए हैं जब आने वाले दिनों में यात्रा खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण एयरलाइन कंपनियों की लागत बढ़ रही है। इससे हवाई किराए में बढ़ोतरी की आशंका है। इसके अलावा सरकार द्वारा मुफ्त सीट आवंटन से जुड़े निर्देश और किराया सीमा हटने जैसी नीतिगत बदलावों का भी टिकट कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अभी बुकिंग करने पर यात्रियों को कम कीमत का फायदा मिल सकता है। हर साल गर्मियों में घूमने वाले लोगों के लिए यह स्कीम फायदे में हो सकती है। समर सीजन में सबसे ज्यादा मांग पहाड़ी राज्यों, समुद्री तटों और धार्मिक पर्यटन स्थलों की रहती है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, कश्मीर, गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई होटल और ट्रैवल एजेंसियां अर्ली बर्ड ऑफर के जरिए ग्राहकों को पहले से बुकिंग करने पर अतिरिक्त छूट दे रही हैं। इससे यात्रियों को न केवल कम कीमत मिलती है, बल्कि पसंदीदा होटल और फ्लाइट चुनने का विकल्प भी मिलता है। समर वेकेशन से पहले ट्रैवल कंपनियों और होटल इंडस्ट्री के बीच ग्राहकों को आकर्षित करने की होड़ तेज हो गई है। तीसरी रात मुफ्त ठहरने से लेकर हजारों रुपये की छूट तक के ऑफर यात्रा को पहले से ज्यादा किफायती बना रहे हैं। आने वाले महीनों में यात्रा खर्च बढ़ने की आशंका के बीच ये ऑफर यात्रियों के लिए बेहतर अवसर साबित हो सकते हैं। जो लोग गर्मियों में घूमने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अभी बुकिंग करना फायदे का सौदा माना जा रहा है।

हिमाचल में सस्ती हुई बिजली, उपभोक्ताओं को नए वित्त वर्ष से मिलेगी राहत, सभी कैटेगरी के लिए दरों में कटौती

हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को नवरात्रि के अवसर पर बड़ी राहत मिली । हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HPERC) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित टैरिफ जारी कर दिए हैं, जिसके तहत सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 1 पैसा प्रति यूनिट की कमी की गई है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। हालांकि यह कटौती मामूली दिखाई देती है, लेकिन राज्यभर के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए यह राहत भरा कदम माना जा रहा है। कमीशन के आदेश के अनुसार घरेलू, कमर्शियल, औद्योगिक, कृषि, सरकारी संस्थान और अन्य सभी कैटेगरी के उपभोक्ताओं को इस कटौती का लाभ मिलेगा। नई दरें लागू होने के बाद उपभोक्ताओं के मासिक बिल में कमी दर्ज होगी। बताया जा रहा है कि बिजली बोर्ड ने राजस्व आवश्यकताओं, पावर परचेज कॉस्ट, ट्रांसमिशन और वितरण खर्च, लाइन लॉस और सब्सिडी जैसे कई कारकों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद उपभोक्ताओं के हित में दरों में मामूली कटौती का फैसला लिया। इससे यह संकेत भी मिलता है कि राज्य में बिजली व्यवस्था को संतुलित रखते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह राहत विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गर्मियों के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने लगती है और पंखे, कूलर, फ्रिज और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से बिल बढ़ जाता है। ऐसे में प्रति यूनिट दर में कमी से कुल बिल पर असर पड़ेगा। भले ही कटौती 1 पैसा प्रति यूनिट की है, लेकिन बड़े स्तर पर खपत करने वाले उपभोक्ताओं को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा। कमर्शियल और छोटे कारोबारियों के लिए भी यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। दुकानों, होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योगों में बिजली खर्च प्रमुख लागत होती है। दरों में कमी से उनकी परिचालन लागत में हल्की कमी आएगी। खासतौर पर पर्यटन सीजन के दौरान होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को बिजली बिल में राहत मिल सकती है। औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी यह कदम सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उद्योगों में बिजली खपत अधिक होती है और प्रति यूनिट दर में मामूली कमी भी कुल खर्च में असर डालती है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा लागत में स्थिरता निवेश को बढ़ावा देती है और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। कृषि उपभोक्ताओं को भी इस फैसले का लाभ मिलेगा। सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग करने वाले किसानों के लिए बिजली दरों में कमी राहत देने वाली है। राज्य में कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल और पंप सेट के जरिए सिंचाई की जाती है, ऐसे में बिजली लागत कम होने से किसानों का खर्च कुछ हद तक कम होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दरों में कटौती के बावजूद बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखा गया है। पावर परचेज कॉस्ट और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के बावजूद उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं बढ़ाया गया। इससे संकेत मिलता है कि राज्य सरकार और नियामक आयोग उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ बिजली क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली दरों में कमी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होता है। इससे उपभोक्ताओं को यह संदेश जाता है कि सरकार और नियामक संस्था उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख रही है। साथ ही यह कदम भविष्य में ऊर्जा दक्षता और बेहतर प्रबंधन को भी प्रोत्साहित करता है। राज्य में बिजली की उपलब्धता, उत्पादन और खरीद के संतुलन को बनाए रखने के लिए आयोग ने कई तकनीकी पहलुओं पर भी जोर दिया है। लाइन लॉस कम करने, स्मार्ट मीटरिंग, बिलिंग व्यवस्था में सुधार और वितरण प्रणाली को मजबूत करने जैसे उपायों को भी प्राथमिकता दी गई है। इन सुधारों से आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें, सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ

हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन द्वारा जारी आदेश के अनुसार संशोधित बिजली दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। अप्रैल महीने से जारी होने वाले बिलों में उपभोक्ताओं को नई दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह राहत घरेलू, कमर्शियल, औद्योगिक, कृषि और सरकारी सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को समान रूप से दी गई है। आयोग के इस फैसले को राज्य में ऊर्जा क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने की दिशा में संतुलित कदम माना जा रहा है। आमतौर पर बिजली दरों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार दरों में कमी से उपभोक्ताओं को सकारात्मक संदेश गया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब ईंधन लागत और ऊर्जा खरीद खर्च बढ़ रहे हैं, दरों में कटौती को राहत भरा कदम माना जा रहा है। उपभोक्ता संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भले ही कटौती मामूली है, लेकिन यह उपभोक्ताओं के हित में है। लंबे समय से मांग की जा रही थी कि बिजली दरों को स्थिर रखा जाए या उनमें कमी की जाए। आयोग के फैसले से यह मांग आंशिक रूप से पूरी हुई है। यदि भविष्य में बिजली उत्पादन बढ़ता है और लाइन लॉस में कमी आती है तो दरों में और राहत संभव है। हिमाचल प्रदेश में जल विद्युत उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं और राज्य को “पावर स्टेट” के रूप में विकसित करने की दिशा में काम जारी है। उत्पादन बढ़ने से बिजली खरीद पर निर्भरता कम होगी और उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकती है। बिजली बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि वितरण व्यवस्था को मजबूत करने और तकनीकी नुकसान कम करने पर लगातार काम किया जा रहा है। स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल बिलिंग और नेटवर्क सुधार जैसे कदमों से लागत कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इन सुधारों का लाभ भविष्य में उपभोक्ताओं को मिल सकता है। नई दरों के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को बिल में भले ही बड़ी कटौती नजर न आए, लेकिन यह संकेत महत्वपूर्ण है कि दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और उद्योगों को भी स्थिर बिजली दरों का फायदा मिलेगा।

यह फैसला आने वाले समय में राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा देगा। पर्यटन, होटल, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र में बिजली खर्च प्रमुख होता है। दरों में कमी से इन क्षेत्रों को संचालन लागत में हल्की राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में बिजली दरों में 1 पैसा प्रति यूनिट की कटौती को उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली नई दरों से राज्य के लाखों उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और बिजली बिल में मामूली ही सही, लेकिन राहत महसूस होगी। सरकार और नियामक आयोग के इस फैसले से यह भी संकेत मिला है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने से बचने की कोशिश की जा रही है।

ईरान-इजराइल जंग के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई, आम आदमी को राहत

ईरान-इजराइल जंग के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आज, शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी टल जाएगी और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की पैनिक बाइंग देखी जा रही थी। वैश्विक हालात को देखते हुए लोगों को आशंका थी कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी थीं और कई राज्यों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बाजार को स्थिर करने और घबराहट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। जानकारों के अनुसार, ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। संघर्ष से पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जो अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। इस तेज उछाल का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों की लागत पर पड़ रहा था। यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती तो कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ता। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर तुरंत दिखाई देता है। संघर्ष से पहले भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के उस महत्वपूर्ण गलियारे के माध्यम से प्राप्त करता था, जो फिलहाल तनाव के कारण अस्थिर बना हुआ है। इससे आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार में दबाव बना हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले से तेल विपणन कंपनियों पर लागत का बोझ कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यदि एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं होती तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 8 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। इससे परिवहन लागत बढ़ती और उसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता। इस बीच रूस की कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। फिलहाल केवल प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य कंपनियां भी कीमतें स्थिर रखेंगी। केंद्र सरकार ने केवल एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की है, बल्कि ईंधन निर्यात से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर पहले दी जा रही व्यापक उत्पाद शुल्क छूट को वापस ले लिया है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।

निर्यात नियम सख्त, घरेलू बाजार को प्राथमिकता

संशोधित व्यवस्था के तहत अब ईंधन निर्यात से संबंधित लाभ केवल कुछ स्पष्ट रूप से परिभाषित श्रेणियों तक ही सीमित कर दिए गए हैं। इससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करना पहले की तुलना में कम आकर्षक होगा और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम संतुलित नीति का संकेत देता है। एक तरफ सरकार ने कंपनियों पर लागत का दबाव कम किया है, वहीं दूसरी तरफ निर्यात पर सख्ती कर घरेलू आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश की है। इससे कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम होगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को सुचारू रखें और किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने दें। राज्यों के साथ भी समन्वय बढ़ाया गया है ताकि वितरण व्यवस्था पर नजर रखी जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान-इजराइल तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार आगे भी ऐसे कदम उठा सकती है। फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार ने संकेत दिया है कि वह महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने को तैयार है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले से आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है, जिससे परिवहन लागत स्थिर रहेगी और महंगाई पर भी दबाव कम पड़ेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार का यह कदम बाजार को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश में बदला मौसम का मिजाज

देश में बदला मौसम का मिजाज : दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में ठंड की वापसी, लोगों ने फिर निकाले कंबल-रजाई

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बीते दो दिनों से जारी बारिश, तेज हवाओं और बादलों के चलते तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को एक बार फिर सर्दी का एहसास होने लगा है। सुबह-शाम की ठंडक के कारण लोगों ने फिर से कंबल और रजाई निकाल ली है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में तेज हवाएं 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं, जिससे मौसम और अधिक ठंडा हो गया है। दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में हल्की बारिश होती रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिन के अलग-अलग समय सुबह, दोपहर, शाम और रात में गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी मौसम का असर साफ देखने को मिला। खासकर अयोध्या में अचानक मौसम बिगड़ गया, जहां तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि हुई। ओले गिरने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश और ठंडी हवाओं ने तापमान में गिरावट ला दी है। इसी तरह राजस्थान के जयपुर, अलवर और भरतपुर में भी बारिश दर्ज की गई, जिससे गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन ठंड का असर वापस महसूस होने लगा है। वहीं हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों से दूर रहना चाहिए। विशेष रूप से किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पहाड़ों में बर्फबारी और बारिश से बढ़ी ठंड, कई राज्यों में अलर्ट–

मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी राज्यों में भी मौसम ने करवट ली है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का दौर जारी है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हो रही है। उत्तराखंड के बद्रीनाथ, केदारनाथ, औली और उत्तरकाशी जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। इससे तापमान में भारी गिरावट आई है और ठंड का असर बढ़ गया है। वहीं देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में हल्की से मध्यम बारिश ने मौसम को ठंडा बना दिया है। हिमाचल प्रदेश में शिमला, मनाली, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में बर्फबारी और बारिश का असर देखने को मिला है। यहां कई जगहों पर सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी मौसम सक्रिय है। पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों और सिक्किम में गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, इन इलाकों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भी संभावना है। मध्य भारत के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। वहीं झारखंड में भी आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के 7 दिन के पूर्वानुमान के अनुसार, 21 और 22 मार्च को कुछ इलाकों में बादल छाए रहेंगे, जबकि 23 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा। इसके बाद तापमान में फिर से बढ़ोतरी होगी और अधिकतम तापमान 30 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। फिलहाल, देश के बड़े हिस्से में बदले मौसम ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर अचानक लौटी ठंड ने लोगों को हैरान कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव अस्थायी है, लेकिन फिलहाल लोगों को सतर्क रहने और मौसम के अनुसार अपने दैनिक जीवन में सावधानी बरतने की जरूरत है।

हिमाचल सरकार का अनुशासनात्मक कदम

हिमाचल सरकार का अनुशासनात्मक कदम, दफ्तरों में नहीं चलेगी मनमर्जी, कर्मचारियों के लिए जींस-टीशर्ट पर लगाया बैन, सोशल मीडिया पर भी सख्ती

शिमला। सरकारी दफ्तरों में अब अनौपचारिक पहनावे और सोशल मीडिया पर खुलकर राय रखने की प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड और ऑनलाइन व्यवहार को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य कार्यस्थल पर मर्यादा, अनुशासन और पेशेवर वातावरण को बनाए रखना है। सुखविंदर सरकार के आदेश के अनुसार, अब कोई भी सरकारी कर्मचारी कार्यालय में जींस और टी-शर्ट जैसे कैजुअल कपड़े पहनकर नहीं आ सकेगा। सभी कर्मचारियों को औपचारिक, साफ-सुथरे और शालीन रंगों के कपड़े पहनना अनिवार्य किया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई कर्मचारी कार्यालयों में अनौपचारिक या पार्टी वियर पहनकर आते हैं, जिससे सरकारी दफ्तरों की गरिमा प्रभावित होती है। नए निर्देशों में पुरुष कर्मचारियों के लिए शर्ट, पैंट या ट्राउजर के साथ जूते या सैंडल पहनना अनिवार्य किया गया है। वहीं महिला कर्मचारियों को साड़ी, सलवार सूट, चूड़ीदार-कुर्ता के साथ दुपट्टा या फॉर्मल सूट के साथ ट्राउजर पहनने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उन्हें चप्पल, सैंडल या जूते पहनने होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्यालयों में या अदालत में पेशी के दौरान किसी भी प्रकार का कैजुअल या पार्टी वियर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए थे, जिनमें कर्मचारी अनौपचारिक कपड़ों में अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स का उपयोग करते हुए सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा कर रहे थे या फिर किसी उत्पाद का प्रचार कर रहे थे। इस तरह की गतिविधियों को अनुचित मानते हुए सरकार ने इसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया है। सोशल मीडिया को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कर्मचारियों को यह कहा गया है कि वे अपने पर्सनल अकाउंट्स के माध्यम से सरकारी नीतियों या योजनाओं पर कोई टिप्पणी न करें। इसके अलावा, उन्हें सार्वजनिक मंचों, ब्लॉग्स या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक या धार्मिक बयान देने से भी बचने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। अधिसूचना में यह भी साफ तौर पर कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इससे यह संकेत मिलता है कि हिमाचल सरकार इस बार अपने निर्देशों को सख्ती से लागू करने के मूड में है।

सुखविंदर सरकार का पेशेवर छवि और प्रशासनिक सख्ती पर जोर

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सरकार के इस फैसले को केवल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे एक व्यापक प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों का व्यवहार, पहनावा और सार्वजनिक छवि सीधे तौर पर सरकार की साख को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि कर्मचारी हर स्थिति में मर्यादा और पेशेवर आचरण का पालन करें। सरकार ने अपने आदेश में 3 अगस्त 2017 के उस पुराने निर्देश का भी जिक्र किया है, जिसमें पहले भी ड्रेस कोड और आचरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि, समय के साथ यह देखा गया कि कई कर्मचारी इन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। यही कारण है कि अब सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। सोशल मीडिया के इस दौर में यह कदम और भी अहम हो जाता है। आज के समय में किसी भी कर्मचारी की एक पोस्ट या टिप्पणी तेजी से वायरल हो सकती है, जिससे सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। ऐसे में कर्मचारियों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने व्यक्तिगत विचारों को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने में संयम बरतें। इस फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह कर्मचारियों के निजी और पेशेवर जीवन के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की कोशिश करता है। सरकार चाहती है कि कर्मचारी अपने आधिकारिक दायित्वों को प्राथमिकता दें और ऐसी किसी भी गतिविधि से बचें, जिससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे। हालांकि, इस फैसले को लेकर कुछ हलकों में यह भी चर्चा है कि इससे कर्मचारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। लेकिन सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक सेवा में कार्यरत लोगों के लिए कुछ मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य होता है, ताकि प्रशासन की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। हिमाचल प्रदेश सरकार का यह निर्णय एक अनुशासित, पेशेवर और जिम्मेदार प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या इससे सरकारी कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।

चैत्र नवरात्रि: आस्था, साधना और आत्मजागरण का दिव्य महापर्व

चैत्र नवरात्रि: आस्था, साधना और आत्मजागरण का दिव्य महापर्व

जब जीवन की भागदौड़ में मन थकने लगता है, जब भीतर कहीं शांति और शक्ति की तलाश गहराने लगती है, तभी चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व एक नई रोशनी बनकर सामने आता है। यह केवल पूजा का समय नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने, मन को निर्मल बनाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने का अद्भुत अवसर है। इन नौ दिनों में हर हृदय “जय माता दी” की गूंज से भर उठता है और श्रद्धा दीपक की तरह जलकर अंधकार को दूर करने लगती है।

प्रकृति के नवजीवन संग आरंभ होता नवरात्रि का उत्सव

जब ठंड की विदाई के साथ वसंत अपनी कोमलता बिखेरता है, जब पेड़ों पर नई कोंपलें मुस्कुराने लगती हैं और वातावरण सुगंध से भर जाता है, तब प्रकृति स्वयं उत्सव का रूप ले लेती है। इसी नवजीवन के साथ चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है। यह समय केवल मौसम के बदलाव का नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत और आत्मिक परिवर्तन का संकेत भी है।

सनातन परंपरा में शक्ति का आध्यात्मिक महत्व

भारतीय सनातन संस्कृति में शक्ति को सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। शिव और शक्ति का संबंध इस ब्रह्मांड की गति और संतुलन का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान इसी शक्ति की आराधना की जाती है, जो जीवन को दिशा, ऊर्जा और उद्देश्य प्रदान करती है। यह साधना बाहरी नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है, जहां व्यक्ति स्वयं से जुड़ता है।

देवी के नौ स्वरूपों में निहित है जीवन का संदेश

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक। प्रत्येक रूप जीवन के एक विशेष गुण और शक्ति का प्रतीक है। इनकी आराधना के माध्यम से साधक अपने भीतर साहस, ज्ञान, धैर्य और आत्मविश्वास का संचार करता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि असली शक्ति हमारे भीतर ही छिपी होती है।

साधना के नौ दिन: आत्मपरिवर्तन की यात्रा

नवरात्रि केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि की एक गहरी प्रक्रिया है। यह नौ दिनों की साधना व्यक्ति को भीतर से बदल देती है। शुरुआत होती है मन और शरीर की शुद्धि से फिर आता है विचारों की स्थिरता का चरण इसके बाद साधना और ध्यान के माध्यम से आत्मा का विस्तार होता है। अंततः जागरण का अनुभव होता है, जहां व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है यह पूरी प्रक्रिया आत्मविकास की एक आध्यात्मिक यात्रा है।

भक्ति, श्रद्धा और आस्था का सुरम्य संगम

नवरात्रि को यदि एक संगीत माना जाए, तो इसका हर दिन एक मधुर स्वर है। दीपक का प्रकाश अज्ञान को दूर करने का प्रतीक बन जाता है और हर प्रार्थना मन की गहराइयों से निकली एक सच्ची पुकार होती है। इस दौरान भजन, कीर्तन और पूजा का वातावरण पूरे समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।

पूजा विधि में छिपा है आत्मसंयम का रहस्य

नवरात्रि की पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन और संयम का अभ्यास भी है। सुबह जल्दी उठना, स्वच्छता रखना, कलश स्थापना करना और उपवास रखना, ये सभी क्रियाएं मन और शरीर को संतुलित करने में सहायक होती हैं। उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और आत्मबल को मजबूत करने का माध्यम है।

जेवर में इतिहास रचने को तैयार

जेवर में इतिहास रचने को तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अगले सप्ताह पीएम मोदी करेंगे भव्य उद्घाटन, सीएम योगी रहेंगे मौजूद

उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब पूरी तरह तैयार है और 28 मार्च 2026 को इसका भव्य उद्घाटन होने जा रहा है। यह सिर्फ एक एयरपोर्ट का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे प्रदेश के लिए “गर्व का दिन” बताया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। अब पूरे प्रदेश की नजरें इस भव्य आयोजन पर टिकी हैं। जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट न केवल भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने जा रहा है, बल्कि एशिया के प्रमुख एविएशन हब के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा। इसकी परिकल्पना केवल एक हवाई अड्डे के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में की गई है। यही कारण है कि इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। पहले चरण में एयरपोर्ट एक रनवे और आधुनिक टर्मिनल के साथ शुरू होगा, जिसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 1.2 करोड़ होगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह टर्मिनल यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करेगा। डिजिटल सिस्टम, स्मार्ट सिक्योरिटी और ग्रीन टेक्नोलॉजी के उपयोग से इसे पर्यावरण के अनुकूल भी बनाया गया है। आने वाले वर्षों में इस एयरपोर्ट का तेजी से विस्तार किया जाएगा। योजना के अनुसार इसे पांच रनवे तक विकसित किया जाएगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। हाल ही में इसे एयरोड्रम लाइसेंस भी प्राप्त हो चुका है, जो इसके संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा। अभी तक इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों और उड़ानों का भारी दबाव रहता है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से यह दबाव काफी हद तक कम होगा और हवाई यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि विकास का इंजन भी साबित होगा। इसके जरिए ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद और बुलंदशहर जैसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सड़क, रेल और मेट्रो नेटवर्क को भी इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे यात्रियों को निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही इस परियोजना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण से लेकर संचालन तक लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर सामने आएगा। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस एयरपोर्ट से आने वाले समय में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न हो सकता है। यह निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। देश-विदेश की कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं, जिससे उत्तर प्रदेश एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभर सकता है। शुरुआत में यहां से रोजाना करीब 150 उड़ानों का संचालन होने की संभावना है, जो धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। यह एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह की उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

रोजगार, निवेश और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बनेगा जेवर एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रभाव केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक संरचना को बदलने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को एक नए विकास मॉडल की ओर ले जाएगी। एयरपोर्ट के आसपास तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो रहा है। नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स हब और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इससे माल ढुलाई और व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह क्षेत्र जल्द ही एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित हो सकता है। पर्यटन के लिहाज से भी यह एयरपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। बड़े संस्थान और अस्पताल इस क्षेत्र में स्थापित होने की योजना बना रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकार की कोशिश है कि यह एयरपोर्ट केवल एक ट्रांसपोर्ट हब न होकर एक “एरो सिटी” के रूप में विकसित हो। यहां होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बिजनेस सेंटर और एंटरटेनमेंट जोन भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र एक आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में उभरेगा। जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि लाखों लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाएगा। 28 मार्च 2026 को होने वाला इसका उद्घाटन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक होगा, एक ऐसे भविष्य की शुरुआत, जहां उत्तर प्रदेश विकास, आधुनिकता और वैश्विक पहचान की नई उड़ान भरेगा।

नवरात्र के शुभ मुहूर्त में सत्ता का बड़ा संदेश

उत्तराखंड में नवरात्र के शुभ मुहूर्त में सत्ता का बड़ा संदेश : धामी कैबिनेट में अचानक हुए मंत्रिमंडल विस्तार ने बदले राजनीतिक समीकरण, जानिए किन चेहरों को मिली मंत्रिपरिषद में एंट्री और क्या हैं इसके मायने

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार का दिन कई मायनों में बेहद अहम साबित हुआ। नवरात्र के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए एक ऐसा राजनीतिक संदेश दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी। सुबह करीब 10 बजे देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पांच नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गरिमामय वातावरण में हुई, जहां राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सबसे पहले राजपुर से विधायक खजान दास ने शपथ ली, जिसके बाद भरत सिंह चौधरी ने संस्कृत में शपथ लेकर समारोह को एक अलग ही आयाम दिया। यह क्षण वहां मौजूद सभी लोगों के लिए खास बन गया और पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।
इसके बाद वरिष्ठ नेता मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा ने भी मंत्रिपद की शपथ ग्रहण की। समारोह में मुख्यमंत्री धामी के अलावा कई वरिष्ठ मंत्री, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला, जो इस विस्तार को पार्टी के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे थे। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह कैबिनेट विस्तार महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। लंबे समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि धामी सरकार अपने मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकती है, और नवरात्र के शुभ अवसर पर इस निर्णय को अमलीजामा पहनाकर सरकार ने एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। इस विस्तार के जरिए भाजपा ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को साधने का प्रयास किया है। देहरादून और हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने अपने मजबूत जनाधार को और सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खजान दास और प्रदीप बत्रा जैसे नेताओं को शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं, अनुभवी नेता मदन कौशिक की एंट्री से सरकार को प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। भरत सिंह चौधरी और राम सिंह कैड़ा को शामिल कर संगठनात्मक संतुलन को भी साधने की कोशिश की गई है, जिससे पार्टी के भीतर सामंजस्य बना रहे और सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि भाजपा नेतृत्व अब चुनावी मोड में आ चुका है और हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाया जा रहा है। कैबिनेट विस्तार के जरिए पार्टी ने यह संकेत भी दिया है कि वह विकास के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों को भी संतुलित करने में जुटी हुई है।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई ऊर्जा या चुनावी रणनीति? धामी सरकार के अगले कदमों पर टिकी सबकी नजर

कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह बदलाव केवल राजनीतिक संतुलन बनाने तक सीमित रहेगा या फिर इससे प्रदेश के विकास कार्यों में भी नई गति देखने को मिलेगी। जानकारों का मानना है कि धामी सरकार इस नए मंत्रिमंडल के साथ विकास योजनाओं को और तेज गति देने की दिशा में काम करेगी। प्रदेश में बुनियादी ढांचे, रोजगार, पर्यटन और निवेश जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में नए मंत्रियों को इन क्षेत्रों में जिम्मेदारी देकर सरकार अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की कोशिश कर सकती है। खासतौर पर देहरादून और हरिद्वार जैसे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी विकास की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। इसके अलावा, यह विस्तार सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भी किया गया है। विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सरकार सभी वर्गों के साथ समान रूप से खड़ी है। यह रणनीति आगामी चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। नवरात्र के दौरान इस तरह का बड़ा निर्णय लेना भी अपने आप में एक प्रतीकात्मक संदेश है। इसे सकारात्मक ऊर्जा, नए आरंभ और जनविश्वास के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी इस अवसर का उपयोग जनता के बीच एक सकारात्मक माहौल बनाने के लिए भी कर सकती है। इस विस्तार के बाद अब धामी कैबिनेट अधिक संतुलित और प्रभावी नजर आ रही है। हालांकि, इसके वास्तविक परिणाम आने वाले समय में ही सामने आएंगे, जब यह देखा जाएगा कि नए मंत्री अपने-अपने विभागों में किस तरह का प्रदर्शन करते हैं।
फिलहाल इतना जरूर है कि उत्तराखंड की राजनीति में इस कदम ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब देखना होगा कि यह कैबिनेट विस्तार अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में धामी सरकार के लिए कितना कारगर साबित होगा ?

Aptus Value Housing Finance Reports 26% Profit Growth in Q3 FY26, AUM Rises to ₹12,330 Crore

Aptus Value Housing Finance India Limited has once again demonstrated strong and balanced growth in the third quarter of FY 2026. The company’s net profit rose 26% year-on-year to ₹239 crore, while profit for the first nine months stood at ₹685 crore – highlighting the strength of its strategy even in a challenging environment.

As of December 2025, Assets Under Management (AUM) grew 21% to ₹12,330 crore. During the third quarter, loan disbursements reached ₹1,030 crore, reflecting steady business momentum. Total income for the quarter increased 22% to ₹569 crore, while nine-month income surged 27% to ₹1,652 crore.

Asset quality remained firmly under control, with gross NPA at 1.6% and net NPA at 1.2%. Strong profitability ratios of 7.9% ROA and 20.2% ROE continue to place Aptus among the best performers in the housing finance industry.

Backed by a network of 335 branches, deep digital adoption, and a data-driven credit approach, Aptus is confidently progressing toward its goal of achieving sustainable growth of 22-24% in the coming years, reinforcing its reputation as a resilient and future-ready housing finance player.