कल होने वाले नगर निकाय चुनाव के लिए हिमाचल तैयार, राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरी की तैयारियां 

हिमाचल प्रदेश में रविवार को शहरी लोकतंत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला होने जा रहा है। पहाड़ों की शांत वादियों से लेकर शहरों की व्यस्त गलियों तक चुनावी हलचल चरम पर पहुंच चुकी है। राज्य के 51 नगर निकायों में होने वाले मतदान को लेकर प्रशासन, राजनीतिक दल और मतदाता पूरी तरह तैयार हैं। शनिवार सुबह से ही ईवीएम मशीनों और चुनावी सामग्री के साथ पोलिंग पार्टियों की रवानगी शुरू हो गई। देर शाम तक सभी मतदान दल अपने-अपने बूथों तक पहुंच जाएंगे, जहां उन्होंने मतदान केंद्रों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया। रविवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू होगा और शाम तक लाखों मतदाता अपने शहरों की सरकार चुनने के लिए वोट डालेंगे। 

इस बार के नगर निगम चुनाव सिर्फ स्थानीय विकास तक सीमित नहीं माने जा रहे, बल्कि इन्हें 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का राजनीतिक सेमिफाइनल कहा जा रहा है। यही वजह है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा दोनों ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेश के चार नगर निगम, 25 नगर परिषद और 22 नगर पंचायतों में चुनाव कराए जा रहे हैं। कुल 449 पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही थी, जिनमें से 10 पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। अब 439 सीटों पर 1147 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनके राजनीतिक भविष्य का फैसला करीब 3 लाख 80 हजार मतदाता करेंगे। 

शनिवार को पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दौरान जिला मुख्यालयों पर चुनावी गतिविधियां तेज रहीं। सुरक्षा व्यवस्था के बीच कर्मचारियों को ईवीएम, मतदान सामग्री और जरूरी दस्तावेज सौंपे गए। प्रशासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी मतदान केंद्रों को रात तक पूरी तरह तैयार कर लिया जाए ताकि मतदान समय पर शुरू हो सके।

नगर निगम चुनाव के लिए लगभग 3600 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रत्येक पोलिंग पार्टी में एक प्रीसाइडिंग ऑफिसर, तीन पोलिंग ऑफिसर और दो से तीन सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन ने चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। प्रमुख शहरों में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। कई जगहों पर सीसीटीवी निगरानी और क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी सक्रिय रखा गया है। राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। 

चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है। आयोग ने साफ किया कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। इन चुनावों में सबसे ज्यादा नजर चार नगर निगमों, सोलन, मंडी, पालमपुर और धर्मशाला पर टिकी हुई है। इन निगमों के चुनाव पार्टी चिन्ह पर हो रहे हैं, इसलिए इनके नतीजों को सीधे तौर पर कांग्रेस और भाजपा की राजनीतिक ताकत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि नगर परिषद और नगर पंचायतों की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद शुरू हो जाएगी, लेकिन नगर निगमों के परिणाम के लिए 31 मई तक इंतजार करना होगा।

कांग्रेस-भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर, पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में

नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पिछले कई दिनों से गर्म रहा। दोनों प्रमुख दलों ने स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य सरकार की नीतियों और विकास कार्यों को भी चुनावी एजेंडा बनाया। कांग्रेस जहां विकास, शहरी सुविधाओं और नई योजनाओं को लेकर जनता के बीच गई, वहीं भाजपा ने कानून व्यवस्था, महंगाई और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। कांग्रेस सीएम सुक्खू, पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री समेत सभी मंत्रियों को चुनाव में उतारा है। 

इसी तरह, बीजेपी अध्यक्ष राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पार्टी प्रभारी श्रीकांत शर्मा और सांसद अनुराग ठाकुर ने भी प्रचार किया है। इन चुनावों के नतीजे आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। खासकर नगर निगमों में जीत-हार को 2027 विधानसभा चुनाव के संकेत के तौर पर देखा जाएगा। प्रशासन की ओर से मतदान को निष्पक्ष बनाने के लिए शराब बिक्री पर निगरानी बढ़ाई गई है। कई जिलों में पुलिस ने फ्लैग मार्च भी निकाला। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। 

राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मतदान प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल और भीड़ नियंत्रण को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब सबकी नजर रविवार को होने वाले मतदान पर टिकी है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता करेंगे। हिमाचल के शहरों में कल सिर्फ पार्षद नहीं चुने जाएंगे, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की भी मजबूत नींव रखी जाएगी।

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