हिमाचल पंचायत चुनाव में नामांकन के आज आखिरी दिन उमड़ी भारी भीड़, ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे उम्मीदवार

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अब चरम पर पहुंच गई हैं। गांवों की गलियों से लेकर पंचायत मुख्यालयों तक चुनावी माहौल पूरी तरह रंग में नजर आ रहा है। राज्यभर में रविवार को नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी। कहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी तो कहीं समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपने प्रत्याशियों के समर्थन में जुलूस निकाले। पंचायत चुनाव भले ही स्थानीय स्तर के हों, लेकिन इस बार गांवों में मुकाबला बेहद दिलचस्प और प्रतिष्ठा का बन गया है।प्रदेश के कई जिलों में नामांकन केंद्रों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। उम्मीदवार समर्थकों के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्रों और नारों के बीच नामांकन भरने पहुंचे। ग्रामीण इलाकों में चुनावी माहौल किसी बड़े राजनीतिक उत्सव से कम नजर नहीं आ रहा। 

पंचायत चुनावों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बार खास तौर पर बढ़ी है, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार 7 और 8 मई तक 42 हजार 562 उम्मीदवार विभिन्न पदों के लिए नामांकन दाखिल कर चुके थे। इनमें प्रधान, उप प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के उम्मीदवार शामिल हैं। आज अंतिम दिन बड़ी संख्या में दावेदारों के पहुंचने से यह आंकड़ा 60 हजार के पार जाने की संभावना जताई जा रही है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 14 और 15 मई को उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि तय समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बार पंचायत चुनावों में चुनाव चिह्न को लेकर भी खास दिलचस्पी देखने को मिल रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही सभी पदों के लिए चुनाव चिह्न तय कर दिए हैं। 15 मई को दोपहर तीन बजे सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। 

आयोग के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को अपनी पसंद का चुनाव चिह्न नहीं मिलेगा। हिंदी वर्णमाला के अनुसार उम्मीदवारों के नामों के आधार पर आयोग द्वारा निर्धारित चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। प्रदेश की 3754 पंचायतों में कुल 31 हजार 214 पदों के लिए चुनाव कराए जा रहे हैं। इनमें 3754 प्रधान, 3754 उप प्रधान, 21 हजार 654 वार्ड सदस्य, 1769 बीडीसी सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। यही वजह है कि इस बार पंचायत चुनावों को लेकर गांव-गांव में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। पंचायत चुनावों को लेकर प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन लगातार बैठकें कर रहा है।

तीन चरणों में होगी वोटिंग, 50 लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे फैसला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन चरणों में कराए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार 26, 28 और 30 मई को मतदान होगा। मतदान को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी से प्रचार अभियान तेज हो गया है। प्रत्याशी घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं, जबकि समर्थक सोशल मीडिया और स्थानीय बैठकों के जरिए माहौल बनाने में जुटे हैं। इन चुनावों में प्रदेश के 50 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पंचायत चुनावों को ग्रामीण विकास और स्थानीय नेतृत्व तय करने की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यही कारण है कि हर पंचायत में मुकाबला काफी दिलचस्प होता जा रहा है।

चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, पेयजल, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। 

प्रशासन ने अधिकारियों को निष्पक्ष मतदान कराने के निर्देश दिए हैं। मतगणना को लेकर भी विस्तृत योजना तैयार की गई है। प्रधान, उप प्रधान और वार्ड सदस्य पदों की मतगणना मतदान वाले दिन ही पंचायत भवन में की जाएगी। वहीं जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों की मतगणना 31 मई को होगी। चुनाव परिणामों के साथ ही प्रदेश की नई पंचायत सरकारों की तस्वीर साफ हो जाएगी। पंचायत चुनावों के नतीजे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। कई बड़े नेता अपने समर्थित उम्मीदवारों को मैदान में उतार चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय चुनाव होने के बावजूद इनका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।

ग्रामीण इलाकों में इस बार विकास, सड़क, पानी, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। कई जगह युवाओं ने पारंपरिक राजनीति को चुनौती देते हुए चुनावी मैदान में कदम रखा है। वहीं महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी पंचायत राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सभी की नजरें उम्मीदवारों की अंतिम सूची और चुनाव प्रचार पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में हिमाचल के गांवों में चुनावी हलचल और तेज होने वाली है।

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