हिमाचल में आज बजेगी पंचायत चुनाव की डुगडुगी, तारीखों के एलान के साथ ही लागू होगी आचार संहिता

पहाड़ों की ठंडी हवा के बीच आज हिमाचल की सियासत में हलचल तेज है। गांव-गांव तक लोकतंत्र का रंग चढ़ने जा रहा है। लोग चौपालों में बैठकर इसी चर्चा में जुटे हैं कि आखिर चुनाव कब होंगे। कहीं चाय की दुकानों पर बहस चल रही है तो कहीं संभावित उम्मीदवार अपने समीकरण साधने में लगे हैं। आज दोपहर बाद सब कुछ साफ हो जाएगा, जब पंचायत चुनाव का आधिकारिक एलान होगा। राज्य चुनाव आयोग ने दोपहर 3:40 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें चुनावी तारीखों की घोषणा की जाएगी। जैसे ही तारीखों का एलान होगा, पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसका मतलब साफ है कि सरकार अब कोई नई योजना, भर्ती, टेंडर या उद्घाटन-शिलान्यास नहीं कर पाएगी। 

इस बार पंचायत चुनाव कई मायनों में खास रहने वाले हैं। प्रदेश के करीब 51 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 85 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 50 हजार बुजुर्ग भी शामिल हैं, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी निभाने को तैयार हैं। गांवों में चुनाव को लेकर उत्साह साफ देखा जा सकता है। पंचायती राज व्यवस्था की बात करें तो इस बार कुल 31,214 पदों पर चुनाव होना है। 

इसमें पंचायत सदस्य, प्रधान-उपप्रधान से लेकर जिला परिषद सदस्य तक शामिल हैं। यही वजह है कि यह चुनाव सिर्फ गांव की सरकार बनाने का ही नहीं, बल्कि स्थानीय विकास की दिशा तय करने का भी बड़ा मौका माना जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मतदाता सूचियां अधिसूचित कर दी गई हैं और वार्ड स्तर पर उनकी प्रतियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है।

शहरी निकायों में पहले ही लग चुकी है आचार संहिता

पिछले दिनों हिमाचल में नगर निकाय चुनाव का एलान किया जा चुका है, जिसके चलते कई शहरी क्षेत्रों में पहले ही आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है। जिला शिमला के रोहड़ू नगर परिषद और नारकंडा नगर पंचायत के चुनाव कार्यक्रम भी जारी किए जा चुके हैं। इन दोनों जगहों पर 22 मई को मतदान होना तय है। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 5, 6 और 7 मई को नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 11 मई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक रखा गया है। शहरी निकायों में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रदेश के 53 नगर निकायों में आचार संहिता लागू हो चुकी है। 

अब पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद यह दायरा पूरे प्रदेश में फैल जाएगा। पंचायत चुनावों का असर सीधे तौर पर गांवों के विकास पर पड़ता है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का जिम्मा काफी हद तक पंचायत प्रतिनिधियों पर ही होता है। ऐसे में यह चुनाव आम लोगों के लिए बेहद अहम हो जाते हैं।राजनीतिक नजरिए से भी यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 

हालांकि पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की नजर इन पर रहती है। यही वजह है कि गांव स्तर पर भी चुनावी सरगर्मी तेज हो जाती है। आने वाले दिनों में हिमाचल के गांवों में चुनावी रंग और गहरा होगा। उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से जनता को रिझाने की कोशिश करेंगे। कहीं वादों की बारिश होगी तो कहीं विकास कार्यों का हिसाब दिया जाएगा। आज का दिन हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद अहम है। जैसे ही चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा, पूरे प्रदेश में लोकतंत्र का पर्व शुरू हो जाएगा। गांव-गांव में चुनावी शोर गूंजेगा और जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए तैयार हो जाएगी।

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